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उज्जैन में अवैध निर्माण पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई: 28 संपत्तियों की लीज निरस्त, विरोध के बीच शांति से हटाया गया कब्जा
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में शुक्रवार सुबह एक बड़ा प्रशासनिक अभियान चला, जब नगर निगम और उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) की टीम भारी पुलिस बल के साथ मुस्लिम बहुल क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने पहुंची। कार्रवाई उन 28 संपत्तियों पर की जा रही थी, जिनकी लीज वर्ष 2014 में ही समाप्त हो चुकी थी या जिन पर अवैध रूप से कॉमर्शियल निर्माण किया गया था। ये सभी संपत्तियां यूडीए की एक पूर्व स्वीकृत योजना का हिस्सा थीं, जिनमें नियमों का खुलेआम उल्लंघन हुआ था।
कार्रवाई की शुरुआत प्लॉट नंबर 49 और 50 पर बनी पांच इमारतों को हटाने से की गई। इन संपत्तियों पर नियमों के विरुद्ध एक ही प्लॉट को टुकड़ों में बांटकर कई लोगों को बेच दिया गया था और आवासीय ज़मीन पर व्यावसायिक निर्माण कर लिया गया था। वर्ष 2024 में यूडीए ने इन पर धारा 248 के तहत अतिक्रमण हटाने का अंतिम आदेश जारी किया था, लेकिन संबंधित पक्ष अदालत चले गए थे। अब जब हाईकोर्ट से स्टे हट गया, तब जाकर प्रशासन ने शुक्रवार को कार्रवाई शुरू की।
कार्रवाई की भनक लगते ही सुबह 5 बजे से बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सड़कों पर बैठकर विरोध करने लगे। हालात को देखते हुए महाकाल मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। हालांकि स्थिति को तनावमुक्त बनाए रखने के लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी, एसडीएम एलएन गर्ग और एडिशनल एसपी नितेश भार्गव खुद मौके पर पहुंचे और शहर काजी तथा मुस्लिम समुदाय के जिम्मेदार लोगों से संवाद किया।
बातचीत के बाद कई लोगों ने प्रशासन से सहयोग किया और स्वेच्छा से अपने कब्जे खुद हटाना शुरू कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई पूर्व में निरस्त की गई लीज और अवैध निर्माण के खिलाफ की जा रही है। उज्जैन जैसे तीर्थनगरी में नियमों को ताक पर रखकर हो रहे निर्माण पर प्रशासन अब सख्त हो गया है।
एडिशनल एसपी नितेश भार्गव ने बताया कि चूंकि कार्रवाई संवेदनशील क्षेत्र में हो रही थी, इसलिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रारंभिक विरोध के बावजूद जब कोर्ट का आदेश लोगों को दिखाया गया, तो स्थिति शांत हो गई और कार्रवाई बिना किसी टकराव के पूरी कर ली गई।